Advantages and disadvantages of eating Tindas vegetables

टिंडे की सब्जी खाने के फायदे और नुकसान

टिंडे (tinda vegetable)  को भारतीय कद्दू या टिंडा भी कहा जाता है। टिंडा शुरुआत से ही भारतीय है लेकिन दक्षिण एशिया और अन्‍य कई गर्म देशों में भी अच्‍छी मात्रा में पाया जाता है।

टिंडे को अंग्रेजी भाषा में एप्पल गौर्ड या बेबी पंपकिन के नाम से भी जाना जाता है जो की हमारे लिए शाकाहारी सब्‍जी का अच्‍छा विकल्‍प है। यह कद्दू और घिया के परिवार से संबंध रखता है।

जिससे हमें काफी सारे पोषक तत्‍वों की प्राप्ति होती है। जो हमारे शरीर के लिए बहुत जरुरी हैं। टिंडे की सब्ज़ि गर्मियों में सबसे ज्यादा खाई जाती है। क्योंकि एक टिंडे में 90 प्रतिशत तक पानी की मात्रा होती है।

टिंडा के पोषक तत्व – Tinda’s Nutrients

टिंडे के अंदर बहुत से पोषक देख़ने को मिलते हैं जो हमारे स्वास्थ के लिए बहुत जरुरी है। टिंडे के अंदर विटामिन्स और खनिज दोनों प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसमें विटामिन सी और विटामिन ए प्रचूर मात्रा में होता है।

आयरन, पोटाशियम, थियामिन, नियासिन, फाइबर, रिबोफल्विन जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में टिंडे में पाए जाते है। टिंडा पानी से भरा हुआ होता है इसके अंदर 90 प्रतिशत तक पानी पाया जाता है, जो गर्मियों में हमारे शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है।

उच्च रक्तचाप  – High Blood Pressure

उच्च रक्तचाप वाले रोगियों को टिंडे के जूस का सेवन करना आवश्यक है। टिंडे के जूस की मदद से उच्च रक्तचाप की समस्या से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।

टिंडे के अंदर काफी मात्रा में पोटाशियम पाया जाता है जो शरीर में मौजूद सोडियम को बाहर निकलने में मदद करता है। साथ ही रक्त वाहियों को शांत करता है जिससे रक्त प्रवाह सुचारू रूप से बिना किसी रुकावट के चलता रहता है।

मूत्र संक्रमण करे दूर – Remove Urinary Infections

टिंडा मूत्र संक्रमण के लिए एक दवाई का काम करता है। टींडे में पानी अधिक मात्रा में होने के कारण शरीर में पानी की कमी नही होती, जिससे किडनी और मूत्र पथ सुचारु रूप से काम करता है।

यह मूत्र पथ और किडनी में मौजूद विषाक्त उत्पादों को बाहर निकलने में मदद करता है। शरीर के सभी अंगों को ठंडा बनाएं रखने में भी मददगार होता है।

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