मणिमहेश झील कैलाश पर्वत में स्तिथ एक बहुत ही लोकप्रिय और धार्मिक पर्टयक स्थान

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Manimahesh Lake Chamba Himachal
Manimahesh Lake Chamba Himachal

हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है, जिस बजह से यहां बहुत से प्राकृतिक संसाधन है, यहां बहुत से प्राकृतिक स्त्रोत है। जो बहुत ही खूबसूरत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है।

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हिमाचल प्रदेश में बहुत सी लोकप्रिय और प्रसिद्ध झीले स्तिथ है, जो बेहद आकर्षित और रोमांचित पर्टयक स्थल है, इन में से बहुत सी झीले धार्मिक है, तो कई बहुत सी रोमांचित हर साल बहुत से लोग यहां घूमने और समय व्यतीत करने किये आते है।

इसी में से एक है हिमाचल प्रदेश में स्तिथ एक बहुत ही पवित्र और धार्मिक पर्टयन स्थान है, जिसे “मणिमहेश झील” के नाम से जाना जाता है।

मणिमहेश झील हिमाचल प्रदेश में स्तिथ प्रमुख तीर्थ स्थान में से एक मानी जाती है, यह पवित्र झील बुद्धिल घाटी में स्तिथ है।

भरमौर से 21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित

यह लोकप्रिय और प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर घाटी भरमौर से 21 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। इस लोकप्रिय झील को कैलाश झील के नाम से भी जाना जाता है।

इस धार्मिक झील की ऊंचाई समुद्रतल से लगभग (18,564 फीट) के साथ 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। हर साल इस झिल में भारी मात्रा में सैलानी घूमने और दर्शन के लिए आते है। यह लोकप्रिय और पवित्र झील भगवान शिव को समर्पित है।

भाद्रपद के महीने में हल्के अर्द्धचंद्र आधे के आठवें दिन इस लोकप्रिय झील पर आयोजित होता भव्य मेला

हर वर्ष भाद्रपद के महीने में हल्के अर्द्धचंद्र आधे के आठवें दिन इस लोकप्रिय झील पर एक बहुत ही अद्भुत और रोमांचित मेला आयोजित किया जाता है।

इतनी ऊंचाई पर भी यह मेला सफलता पूर्वक मनाया जाता है। यह पवित्र झील हजारों लाखों तीर्थयात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करती है। इस झील को बहुत ही पवित्र माना जाता है।

इस झील को लेकर बहुत सी ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताये है। कहा जाता है की जो भी व्यक्ति इस पवित्र जल में डुबकी लेता है, वो अपने सभी पापो से मुक्त हो जाते है। भगवान शिव को समर्पित इस मेले को यहां के गद्दी समुदाय के लोगो द्वारा “जातर” के नाम से भी जाना जाता है।

भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है इस झील में

इस समुदाय के लोगो द्वारा मनाई जाने वाली जातर के प्रमुख भगवान शिव अधिष्ठाता देवता हैं। इस की यह मान्यता है की इस पर्वत जिसे कैलाश पर्वत के नाम से जाना जाता है।

इस पर्वत पर भगवान शिव का बास माना जाता है, मान्यता है की इस स्थान में भगवान शिव रहते है। इस लोकप्रिय कैलाश पर्वत पर स्तिथ एक शिवलिंग के रूप में एक चट्टान स्तिथ है जिसे भगवान शिव की अभिव्यक्ति माना जाता है। यहां के स्थानीय लोगों की यह मान्यता के इस पर्वत के आधार पर बर्फ के मैदान को शिव का चौगान कहा जाता है।

कैलाश पर्वत की चोटी पर अभी तक कोई भी नहीं पहुँच पाया

इस प्रसिद्ध और लोकप्रिय कैलाश पर्वत को अजेय माना जाता है। मान्यता है की अभी तक इस पर्वत की चोटी तक कोई भी नहीं पहुँच पाया है। और जिस भी व्यक्ति ने भी प्रयास किया है, वो हर बार असफल ही रहे है।

कोई भी व्यक्ति अभी अब तक इस चोटी को माप करने में सक्षम नहीं हो पाया है, यहां तक की इस से भी बड़े पर्वतो में पर्वतारोहियों ने विजय प्राप्त की है।

उदाहरण के तोर पर माउंट एवरेस्ट, K2, कंचनजगा, इन सभी पर्वतो पर चढ़ाई हो चुकी है, तथा पर्वतारोहियों द्वारा इन पर्वतो पर फतय कर ली गयी है।

इसी के साथ बहुत सी चोटियों पर विजय प्राप्त की है। परन्तु इस पवित्र पर्वत पर अभी तक कोई भी नहीं चढ़ पाया है। जिस का कारण इस पर्वत की धार्मिक मान्यता है।

एक ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यता के अनुसार

एक ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार एक गद्दी चरवाहे को सपने में भगवान के दर्शन हुए थे। इसी के बाद भगवान शिव ने उसे यह वरदान दिया था की वो उस चरवाहे को कैलाश पर्वत में दर्शन देंगे, मगर उसे यह कहा था की जैसे जैसे वो पर्वत पर चढ़ेगा उसे अपनी एक भेड़ की बलि देनी होगी।

मगर इस दौरान उसे पीछे मुड़कर नहीं देखना होगा और निरंतर पर्वत पर चढ़ना होगा। और यदि उसने मूड के पीछे देखा तो उस की मृत्यु हो जायेगी।

एक चरवाहे की कहानी

इसी दौरान उस ने अपने बकरियों और भेड़ो के झुंड के साथ इस पवित्र पहाड़ पर चढ़ने की कोशिश शुरू की और पर्वत पर चढ़ना शुरू कर दिया और वो कुछ दुरी पर चढ़ते चढ़ते बलि देता गया, उस ने धीरे-धीरे अपने सभी बकरियों की बलि दे दी। फिर भी उस की बकरियां खत्म नहीं हो रही थी।

इसी लिए कुछ समय बाद वो बहुत ही हैरान हुआ की यह कैसे हो रहा है। उस के पास तो इतनी भेड़ बकरिया तो थी नई फिर भी यह कहा से आ रही है।

चोटियों की श्रृंखला दुर्भाग्यपूर्ण चरवाहा और उसके झुंड के अवशेष स्तिथ

मगर जैसे ही वो कैलाश पर्वत के नजदीक पहुंचा वैसे ही उसे इस बात की चिंता सताने लगी की अब वो भीत करीब पहुंचने वाला है। और उस ने अंतिम चढ़ाई के दौरान पीछे देख लिया, वो इस भगवान शिव की माया को समज नहीं पाया और जैसे ही वो पर्वत के अंतिम स्थान में पहुंचा, और पीछे देखा तो वो उसी स्थान में वो एक पत्थर में बदल गया।

कहा जाता है की अभी भी इस प्रमुख चोटी के नीचे छोटे चोटियों की श्रृंखला दुर्भाग्यपूर्ण चरवाहा और उसके झुंड के अवशेष हैं।

पवित्र झील के पानी को गग्गा जल भी कहा जाता

एक और पवित्र और पौराणिक मान्यता के अनुसार भक्तों द्वारा इस पवित्र कैलाश की चोटी को केवल तभी देखा जा सकता है जब भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। ज्यादा तर यह चोटी खराब मौसम के दौरान बादलों के पीछे छिप जाती है। माना जाता है की यह भगवान शिव की नाराजगी का संकेत है।

यहां बहुत से तीर्थयात्रियों और श्रदालुओ द्वारा हर वर्ष इस झील की यात्रा की जाती है। इस पवित्र झील के पानी को गग्गा जल भी कहा जाता है, झील के पानी को बहुत ही पवित्र माना जाता है, जिसे श्रदालु अपने साथ अपने घर ले जाते है।

झील के परिधि के चारों ओर तीन बार चक्क्रर लगाते है श्रदालु

इस पवित्र झील के जल में स्नान करने के बाद, तीर्थयात्री इस झील के परिधि के चारों ओर तीन बार चक्क्रर लगाते है। हिमाचल में स्तिथ यह बहुत ही खूबसूरत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर झील है।

मणिमहेश झील की यात्रा करने के लिए श्रृदालु विभिन्न मार्गों से यहां पहुचते है। चम्बा जिले के लाहौल-स्पीति से तीर्थयात्री कुगति पास के माध्यम से इस पवित्र धार्मिक स्थान में पहुंचते हैं। जिला कांगड़ा और मंडी में से कुछ श्रदालु कवारसी या जलसू पास के माध्यम से इस झील में पहुंचते हैं।

यात्रा के लिए सही और सुरक्षित मार्ग

हिमाचल प्रदेश में मणिमहेश झील आने का सबसे आसान मार्ग चम्बा से माना जाता है ,यह मार्ग भरमौर के हड़सर से शुरू होता है। हडसर और मणिमहेश के बीच एक महत्वपूर्ण स्थाई स्थान है, जिसे धन्चो के नाम से जाना जाता है।

जहां तीर्थयात्रियों आमतौर पर रात्रि निवास करती है। यहाँ एक सुंदर और बहुत ही खूबसूरत झरना है। जो यहां आये श्रदालुओ को बेहद रोमांचित करता है।

शिव क्रोत्री नामक दो धार्मिक और पवित्र महत्व के जलाशय

इस पवित्र और लोकप्रिय मणिमहेश झील से करीब एक किलोमीटर की दूरी पहले गौरी कुंड और शिव क्रोत्री नामक दो धार्मिक और पवित्र महत्व के जलाशय हैं। इस स्थान की यह मान्यता है, की इस स्थान में गौरी और शिव भगवान ने क्रमश स्नान किया था। जिस के बाद यहां हर साल बहुत से श्रदलु यहां स्नान करने के लिए आते है।

यदि आप को प्रकृति से प्रेम है और आप हिमाचल में एक धार्मिक स्थान की यात्रा करना चाहते है, तो इस स्थान की एक बार यात्रा अवश्य करे।