Lord Shiva
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भगवान भोले शंकर के गले में विराजमान वासुकी नाग की कहानी

हिन्दू सभ्यता में हर देवी देवताओं की कुछ न कुछ सवारी हैं तो उनमे से कुछ देवी देवताओं ने अपने शरीर में किसी न किसी विशेष जीव को धारण किया हैं। आपको देवों के देव महादेव भोले शंकर के गले में आपको नाग हेमशा विराजमान मिलेंगे। आखिर कौन हैं यह नाग, और क्या रहस्य है की वो भगवन भोले शंकर में गले में विराजमान हैं।

नागराज वासुकी नाग के रहस्य

भगवन शिव शनकर के गले में जो नाग विराजमान हैं उनका नाम वासुकी हैं, वह भगवान शंकर के सबसे बड़े भक्त हैं। उनकी भक्ति से खुस होकर भगवन शंकर ने वासुकि को अपने गणों में शामिल कर लिया था। नागधन्वातीर्थ में सभी देवताओं ने वासुकी को नागराज का दर्जा दिया था।

नागराज वासुकि को नागलोक का देवता भी कहा जाता हैं। वासुकी नाग का जन्म ऋषि कश्यप और कद्रु के गर्भ से हुआ था। नागराज वासुकी नाग की पत्नी का नाम शतशीर्षा था।

वासुकी नाग के कई भाई

वासुकी नाग के कई भाई थे जिनका नाम शेष, तक्षक, पिंगला और कर्कोटक था। शेष नाग वासुकी जी के बड़े भाई थे। शेष नाग विष्णु भगवन के सेवक हैं जबकि वासुकी नाग भगवन शंकर के सेवक हैं। ऐसा माना जाता हैं की नागराज वासुकी नाग का राज्य कैलाश पर्वत के पास हैं।

पुरानी कथाओं के अनुसार माना जाता हैं नाग जाती के लोगो ने ही शिव लिंग की पूजा करना शुरू किया थी। कियोंकि भगवन शंकर जी के गले में वासुकी जी विराजमान थे।

कंस की जेल से भगवान कृष्ण को गोकुल ले जाने में मुख्य भूमिका

पुरानी कथाओं में बताया गया हैं की जब वासुकी नाग कंस की जेल से कृष्ण भगवन को गोकुल ले जा रहे थे तब बहुत बारिश हो रही थी और यमुना नदी का उफान भी बहुत ज्यादा था, तब वासुकी नाग ने तेज़ बारिश और यमुना के उफान से भगवान कृष्ण की रक्षा की थी। नागराज वासुकी नाग के सर पर नागमणि होती हैं।

जब भगवन भोले शंकर जी की पूजा करते हैं तब उसके साथ वासुकी नाग की भी पूजा होती हैं। इसलिए ऐसा कहा जाता हैं नागपंचमी के अवसर पर शेषनाग की पूजा के बाद वासुकी नाग की पूजा भी जरूरी होती हैं।