Yes Bank takes possession of Anil Ambani
Yes Bank takes possession of Anil Ambani

क़र्ज़ न चुकाने पर येस बैंक ने जब्त किया अनिल अम्बानी का मुख्यालय

2 हज़ार 892 करोड़ रुपये का बकाया क़र्ज़ ना चुकाने पर येस बैंक ने अनिल अम्बानी का मुख्यालय जब्त कर लिया है। इसके साथ बैंक ने अख़बार में जानकारी देते हुए कहा है कि अनिल अंबानी की ‘रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर’ कंपनी ने पूरा क़र्ज़ नहीं चुकाया है जिसके चलते उन्होंने उनके मुम्बई में स्थित दो फ्लैट को अपने कब्जे में ले लिया हैं।

अनिल अंबनी की अनिल धीरूभाई अम्बानी कंपनी की सारी कम्पनिया मुंबई में स्थित ‘रिलायंस सेंटर’ कार्यालय से चलती हैं।

पिछले कुछ साल से इस कंपनी की दशा खराब थी जिसके चलते कुछ के हिस्सेदारी बेचनी पड़ी और कुछ कंपनियों का दिवाला निकल गया।

यस बैंक के मुताबिक येस बैंक ने अनिल अम्बानी को 6 मई 2020 को नोटिस दिया था। जिसके 60 दिन बाद भी अनिल अम्बानी की कंपनी इस क़र्ज़ को नहीं चूका पायी। जिसके चलते येस बैंक ने अनिल अम्बानी की तीनों प्रॉपर्टियों पर कब्जा कर लिया है।

येस बैंक ने जनता को जानकारी देते हुए कहा हैं की कोई भी व्यक्ति इन प्रॉपर्टियों में किसी तरह का कोई भी लेनदान ना करे। कियोंकि इन प्रोपर्टियो को हमने कब्जे में लिया है।

पिछले कुछ समय से अनिल अम्बानी का कोई भी धंधा अच्छे से नहीं चल रहा हैं जिसके चलते उनको बहुत नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

लगातार झेल रहे Business Losses

ऐसी हालत में वो या तो अपने कारोबार को बंद कर रहे हैं या बेच रहे हैं। इसके बाद उनको राफेल का ठेका मिला लेकिन इसमें में भी उनको कोई फ़ायदा नहीं हुआ और बैंक के रूप में उनके सामने एक नई समस्या आ गयी।

आपको बता दें रफ़ाल बनाने वाली फ़्रांसीसी कंपनी डसॉ एविएशन ने अनिल अंबानी की रिलायंस एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड ऑफ़सेट पार्टनर बनाया था।

कभी मुकेश अंबानी से ज़्यादा थी शोहरत

2007 में फ़ोर्ब्स लिस्ट में दोनों भाई अनिल अम्बानी और मुकेश अम्बानी का नाम अमीर लोगों की लिस्ट में काफी ऊपर था।

2007 की लिस्ट के अनुसार अनिल अम्बानी के पास 45 अरब डॉलर और मुकेश अम्बानी के पास 49 अरब डॉलर थे।

एक समय में ऐसा माना जा रहा था की अनिल अम्बानी की लालसा योजना के एक शेयर की कीमत एक हज़ार तक पहुँच जाएगी। अगर ऐसा होता तो वो मुकेश अम्बानी से आगे निकल सकते थे।

एक समय में अनिल अम्बानी को बिज़नेस में सबसे अच्छा खिलाड़ी माना जाता था और तब उनके पास अपने बड़े भाई मुकेश अम्बानी से ज्यादा शोहरत थी। लेकिन तब धीरूभाई अम्बानी जीवित थे।

क़र्ज़ का बोझ

1980 से 1990 के बीच धीरू भाई रिलायंस ग्रुप के शेयर की कीमत अच्छी हुआ करती थी और निवेशकों को उनके ऊपर पूरा भरोसा रहता था।

2010 में जब गैस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला अनिल अम्बानी के पक्ष में नहीं दिया था उसके बाद से रिलायंस पावर के शेयर वैल्यू कम होने लगी थी।

शेयर के भाव गिरते देख अनिल अम्बानी के पास बैंको से कर्ज़ा लेने के अलावा और कोई दूसरा रस्ता नहीं था।

फिर जैसे जैसे समय बीतता गया मुकेश अम्बानी का कारोबार बढ़ता रहा और अनिल अम्बानी क़र्ज़ में डूबते गए। फोर्ब्स की अमीर लोगों की सूची में मुकेश अम्बानी भारत के सबसे आमिर आदमी हैं।

Virender Singh