दमा का आयर्वेदिक इलाज

जब भी किसी व्यक्ति को साँस लेने में समस्या होती हैं तो उसे दमा (Asthma) कहते हैं। प्रदूषण के कारण या फिर किसी चीज की एलर्जी के कारण इस समस्या को देखा जा सकता हैं।

दमे को शवास रोग भी कहा जाता हैं। दुनिया में कई लोग इस बीमारी के शिकार हैं। अस्थमा 5 प्रकार के होते हैं तो आइये जानते हैं इनके बारे में।

अस्थमा के प्रकार

अस्थमा की शरुआत पेट से होती जो कुछ दिनों के बाद छाती तक पहुंच जाता हैं। अस्थम 5 प्रकार के होते हैं और इन सब मे अंतर होता हैं।

ऊर्ध्‍व श्‍वास (Vertical breath)

अगर समस्या के रहते अस्थमा का इलाज न कराया जाए तो यह आपकी जान भी ले सकता हैं। ऊर्ध्‍व श्‍वास में व्यक्ति को साँस लेने में समस्या होती हैं जिसकी वजह से उसके मस्तिष्क और दिल को सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती हैं।

जिसके बाद से वह व्यक्ति ऊपर देखने लगता है और साँस लेने की कोशिश करता हैं। जिसके चलते व्यक्ति को सिर और सीने में दर्द होने लगता हैं।

तमक श्‍वास (Blunt breath)

इस अस्थमे में हवा कम होने लगती हैं जिसके कारण गर्दन और सिर अकड़ना शुरू होजाते हैं। यह अस्थमा बलगम को भी बढ़ावा देता हैं। इस अस्थमे में व्यक्ति को राइनाइटिस (Rhinitis) शुरू हो जाती हैं जिसके बाद से जुकाम के अटैक आना शुरू हो जाते हैं।

व्यक्ति ठीक तरह से साँस भी नहीं ले पता पता हैं। जिसके बाद से व्यक्ति के सिर और सीने में दर्द शुरू हो जाता है और वह व्यक्ति होश खोने लगता हैं।

कभी कभी पित्त की ससमय इसमें शामिल हो जाती हैं। वलगम के निकलने का बाद इसे रहत मिलती हैं।

महा श्‍वास (Great breath)

इसमें व्यक्ति को साँस लेने में समस्या महसूस होती हैं जिसके बाद उससे ज्यादा हवा की जरूरत होती हैं जोकि उससे गहरी साँस लेने पर भी नहीं मिल पाती हैं।

इस स्थिति में व्यक्ति की आंखे घूमना बंद हो जाती है और वह होश खो बैठता हैं। जिसके बाद से व्यक्ति बोलन के सक्षम में नहीं होता हैं।

छिन्‍न श्‍वास (Isolated breath)

इस अस्थमे में व्यक्ति को रुक रुक के साँस पर्याप्त होती है जिसके कारण उसको अचानक से साँस आना बंद भी हो जाती हैं। इस स्थिति में व्यक्ति का पेट फूलने लगता है जो गैस बनने की वजह से होता हैं।

क्षुद्र श्‍वास (Short breath)

यह छोटा सा अस्थमा होता है जिसे आसानी से ठीक कर सकते हैं। यह अस्थमा भारी भोजन, ज्यादा तला खाना या फिर अपनी इच्‍छाओं को दबाने से होता हैं।

अस्थमा के आयुर्वेदिक इलाज

अस्थमे को आयर्वेद के तरीको से भी ठीक किया जा सकता हैं जिसके कई तरह के इलाज शामिल हैं। तो आइए जानते है अस्थमा के आयुर्वेद के इलाज के बारे में।

विरेचन कर्म

विरेचन कर्म कि सहायता से फेफड़ो में मौजूद वलगम को वापिस पेट में भेजना का काम किया जाता हैं ताकि इसे शरीर के बहार निकला जा सके। इसे पेट में ट्यूमर जैसी बीमारियों के इलाज के लिए अच्छा माना जाता हैं और शरीर में मौजूद विषाक्‍त पदार्थ को निकालने में सहायता करता हैं।

बस्‍ती कर्म

बस्‍ती कर्म एक एनिमा क्रिया हैं जिसमे व्यक्ति के अंदर जमे हुए वात, वलगम और पित्त को साफ़ करने का काम करती हैं। इसकी सहायता से सूजन में कमी आती हैं और साँस लेने में आसानी होती हैं।

इसमें इस्तेमाल किया जाना वाला काढ़ा या तेल अलग अलग तत्वों वाली जड़ी-बूटियों के गुणों से भरा होता हैं।

स्‍वेदन

स्‍वेदन एक ऐसी विधि है जिसमे व्यक्ति के शरीर पर पसीना लाया जाता हैं। स्वेदन का प्रयोग अकड़न, भारीपन और जुकाम को दूर करने में भी किया जाता हैं। इसकी सहायता से शरीर के अंदर जमे वलगम को ढीला कर के बाहर निकलने में मदद करता हैं।

वमन कर्म

वमन कर्म भी विरेचन कर्म की तरह ही वलगम को फेफड़ो से पेट ले जाकर उसे बाहर निकालता हैं। इसमें इस्तेमाल किए जाने वाली जड़ी बूटियों की सहायता से उलटी करवाई जाती हैं।

जो शरीर में मौजूद वलगम और विषाक्त पदार्थ को बाहर निकालता हैं। वमन कर्म में नीम, कला नमक, मुल्थी, पिप्पली और आमलकी जैसी जड़ी बूटियों का इस्तेमाल किया जाता हैं।

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