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चाणक्य क्यों देते थे क्यों देते थे, आइये जानते हैं इसके पीछे का राज़

इतिहास के महत्वपूर्ण शाशक चन्द्रगुप्त मौर्य को चाण्यक्य क्यों खाने में जहर डाल कर देता था। आज मैं आप को एक बहुत ही रोचक तथ्य बताने जा रहा हूँ।

चन्द्रगुप्त मौर्य के भोजन में चाण्यक्य रोज थोड़ा थोड़ा जहर क्यों डाल के दिया करते थे इस की जानकारी आज आप को दी जायेगी। चाणक्य इस लिए यह किया करते थे।

जानिए कारण

क्युकी यदि दुशमन चन्द्रगुप्त की जहर देकर मारने की कोशिश करे तो जहर का उन पर अधिक असर न कर पाए। इसलिय चाणक्य रोज थोड़ा सा जहर लेने से चन्द्रगुप्त का शरीर जहर के लिए पहले से ही तैयार हो गया था। चाणक्य की इस योजना के बारे में किसी को भी जानकारी नहीं थी।

खाने में जहर मिलाकर ना दे इसी कारण वह चंद्रगुप्त मौर्य को बचपन से खाने के साथ जहर दिया करता था

इसी के साथ ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार चाणक्य चंद्रगुप्त मौर्य को हर तरीके से शक्तिशाली बनाना चाहता था इस लिए वो इस के लिए विभिन्न कार्य किया करता था। इसी दौरान चाणक्य ने कहा की कोई चंद्रगुप्त मौर्य को खाने में जहर मिलाकर ना दे इसी कारण वह

चंद्रगुप्त मौर्य को बचपन से खाने के साथ जहर दिया करता था। जिसके बारे में चंद्रगुप्त मौर्य को भी जानकारी नहीं थी।

बताया जाता है की एक दिन चंद्रगुप्त मौर्य भोजन कर रहे थे तभी उनकी पत्नी उनके साथ भोजन करने लगी जब चाणक्य के गुप्त चरो ने यह देखा तो चाणक्य को संदेश दिया चंद्रगुप्त मौर्य की पत्नी उस समय गर्भवती थी।

क्यों मारा चंद्रगुप्त मौर्य की पत्नी को चाणक्य ने

इसी लिए चाणक्य ने शिशु को बचाने के लिए तलवार निकाली और और चंद्रगुप्त मौर्य की पत्नी के पेट को काट दिया था तथा चाणक्य ऑपरेशन द्वारा एक बिंदु के रूप में बच्चे को

बाहर निकाल लिया बताया जाता है की इसलिए उस बच्चे का नाम बिंदुसार पड़ा और मौर्य काल का यह पहला ऑपरेशन भी माना जाता है।

धूर्त मंत्री सुबंधु रोज बिन्दुसार को चाणक्य के खिलाफ बड़काता था

इस कारण चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य की पत्नी की हत्या कर दी थी। चाणक्य की लोकप्रियता से ईर्ष्या रखने वाले धूर्त मंत्री सुबंधु ने इस कहानी को बदलकर बिन्दुसार के मन में चाणक्य के खिलाफ जहर भर दिया था तथा वो रोज बिन्दुसार को चाणक्य के खिलाफ भड़कता था।

भारत पर सिकंदर के आक्रमण का परिणाम मौर्य वंश की स्थापना थी

ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार भारत पर सिकंदर के आक्रमण का परिणाम मौर्य वंश की स्थापना थी। चन्द्रगुप्त ने पहले आचार्य चाणक्य की मदद से उत्तरापथ पर विजय प्राप्त की और फिर मगध पर भी आक्रमण किया था।

मगध उस समय भारत का सबसे बड़ा राज्य हुआ करता था। बताया जाता है की वहां के शासक धनानंद बेहद लालची और अयोग्य थे। चंद्रगुप्त ने उसे मार डाला और राज्य पर अपना अधिकार जमा लिया प्राप्त किया।

चंद्रगुप्त के दुश्मन बढ़ते गए आचार्य ने हर तरह से अपनी सुरक्षा का प्रबंध

इस प्रकार चंद्रगुप्त के दुश्मन बढ़ते गए आचार्य ने हर तरह से अपनी सुरक्षा का प्रबंध किया लेकिन वह हमेशा चंद्रगुप्त को कोई जहर नहीं देने से डरता था।

इसलिए उसने अपने भोजन में थोड़ा जहर जोड़ना शुरू कर दिया। इसी के साथ बताया गया की अब अगर कोई दुश्मन उसे जहर दे देता है तो जहर उसके शरीर को प्रभावित नहीं करेगा।

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