आदी पुर्खा मंदिर मंडी में स्थित एक लोकप्रिय और प्रसिद्ध पर्टयक स्थान

हिमाचल प्रदेश में बहुत से लोकप्रिय और प्रसिद्ध पर्टयक स्थान हैं।जो अपनी लोकप्रियता के लिए देश विदेश में जाने जाते हैं।इन्हे में से एक है हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी में आदी पुर्खा मंदिर यह हिमाचल प्रदेश में स्थित एक बहुत ही ऐतिहासिक मंदिरो में से एक है।

यह पवित्र और धार्मिक स्थान हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के तिहरी उत्तरसल में स्थित है।हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी का यह मंदिर जो आदी पुर्खा के नाम से विख्यात है। मंडी में बहुत से लोकप्रिय और प्रसिद्ध धार्मिक स्थान हैं।

धार्मिक मंदिर तिहारी गांव में पराशर हिल में स्थित है

मंडी जिले को छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है।यह प्रसिद्ध और धार्मिक मंदिर भगवान श्री ब्रह्मा जी को समर्पित एक धार्मिक और लोकप्रिय स्थान है।

यह जिला मंडी घूमने आये सैलानियों के लिए एक लोकप्रिय और प्रसिद्ध पर्टयक स्थान है। यह एक बहुत ही ऐतिहासिक और धार्मिक मंदिर तिहारी गांव में पराशर हिल में स्थित है।

हर साल यहां बहुत से पर्टयक घूमने और समय व्यतीत करने के लिए आते हैं।

चारो तरफ से प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर

इस मंदिर को आप पराशर पहाड़ी के ऊपर के बाकी घर तिहारी गांव से स्पष्ट रूप से देख सकते है।यहां का नजारा बहुत ही प्यारा और खूबसूरत है।

जो चारों तरफ से प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है।यहां के दृश्य यहां घूमने आये सैलानियों को बहुत ही रोमांचित करते हैं।यहां के स्थाई लोगो की यह मान्यता है कि तिहारी और खोखन गांव कुल्लू रियासत से सबंधित थे।

यह एक बहुत ही आकर्षित और लोकप्रिय स्थान है।

कैसे पड़ा आदी पुर्खा मंदिर का नाम

हिमाचल प्रदेश के दोनों गांवों के मूल निवासी पूरी श्रद्धा के साथ खोखन ब्रह्मा की पूजा अर्चना करते थे। इस मंदिर की यह मान्यता है कि जिला मंडी और कुल्लू के बीच एक क्षेत्रीय विवाद उत्पन्न हुआ था।

जिसके परिमाण स्वरूप इन दो गांवों को अलग कर दिया गया। मान्यता है कि तिहारी गांव के मूल निवासी ने आदी ब्रह्मा मंदिर को अपने अंदर रखने का फैसला किया और उन्होंने इसे आदी पुर्खा मंदिर नाम दिया।

हर साल यहां बहुत से श्रदालु दर्शन के लिए आते हैं।यह एक बहुत ही धार्मिक और ऐतिहासिक मंदिर है।

खोखान मंदिर में स्तिथ कुछ मूर्तियों और छवियों को तिहारी मंदिर में स्थानांतरित कर दिया गया

इस मंदिर की यह मान्यता है की जब दोनों गांवों को अलग किया गया था तो इस खोखान मंदिर में स्थित कुछ मूर्तियों और छवियों को तिहारी मंदिर में स्थानांतरित कर दिया गया था।

इसलिए कहा जाता है कि स्थापना के समय इस मंदिर को तिहारी उत्तराल के आदी पुर्खा मंदिर के रूप में नामित करने का निर्णय लिया गया था।

इसी के साथ इस मंदिर की बहुत सी पौराणिक मान्यताएं हैं।जिस वजह से यह मंदिर हमेशा से ही चर्चा में रहता है।

धार्मिक मंदिर का निर्माण पगोडा संरचना आदि पुर्खा तीन स्तरों का खूबूसरत नजारा

इस लोकप्रिय और धार्मिक मंदिर का निर्माण पगोडा संरचना आदि पुर्खा तीन स्तरों और पूरी संरचना के औपचारिक सद्भाव की अपनी प्रबल और अच्छी तरह से इरादा व्यवस्था के लिए दिलचस्प है।

आदी ब्रह्मा जी को कुल्लू दशहरा महोत्सव में झाकियों में लाया जाता है।जहां आदी पुर्खा चुहर घाटी से पश्कोट और हुरंग नारायण देवताओं के साथ मंडी शिवरात्रि में भाग लेते हैं।

हर साल बहुत से श्रदालु यहां घूमने और समय व्यतीत करने के लिए आते हैं।यह मंदिर इतना पवित्र और धार्मिक है कि जो भी यहां आता है।

वो यहां से खाली हाथ नहीं जाता।यहां के लोगों का कहना है आप भी यहां दर्शन के लिए आये और इस धार्मिक स्थान में मौजूद प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकते है।

Aadi Purkha Temple is a popular and famous place in Chhoti Kashi Mandi