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आखिरकार क्यों नहीं उड़ता हिमालय के ऊपर से हवाई जहाज ?

यदि आप के दिमाग में भी यह बात सामने आ रही है कि हिमालय पर्वत के ऊपर से हवाई जहाज क्यों नहीं उड़ता है। आज विज्ञान और वैमानिकी ने इतनी उन्नती कर ली है।

इसी के साथ मनुष्य ने वायुयान को ध्वनि की गति से दोगुना और पृथ्वी ग्रह से बाहर उड़ान भरने में सक्षम बनाया है जिससे मनुष्य एक स्थान से दूसरे स्थान में बहुत ही आसानी से पहुंच सकते हैं।

पृथ्वी पर कुछ स्थान ऐसे हैं जहाँ हवाई जहाज नहीं उड़ते

किसी भी महाद्वीप पर किसी भी देश के लिए हवाई यात्रा संभव है। इसी के साथ पृथ्वी पर कुछ स्थान ऐसे हैं जहाँ हवाई जहाज नहीं उड़ते हैं, जैसे कि हिमालय पर्वत, अभी भी बहुत से लोगो के मन में यह बात सामने आती ही होगी की हिमालय के ऊपर जहाज क्यों नहीं उड़ता है।

अधिकांश कारण वास्तविक वैज्ञानिक तथ्य

इसी के साथ वर्षों से कई सिद्धांतों का गठन किया गया है, साथ ही क्यों हिमालय या तिब्बती क्षेत्र में विमान नहीं उड़ते हैं इसी के साथ अधिकांश कारण वास्तविक वैज्ञानिक तथ्य हैं जिन के आधार पर इसी के साथ कुछ लोगों ने कुछ अंधविश्वासों को भी साझा किया है।

अनिष्ट शक्ति जो हवाई जहाज को गिराती

इसी के साथ जैसे कि अदृश्य अनिष्ट शक्ति जो हवाई जहाज को गिराती है, साथ ही गिरते हुए योद्धाओं के भूत और यहां तक ​​कि घिनौने स्नोमैन या यति की उपस्थिति को भी।

हिमालय में माउंट सहित 20,000 फीट से अधिक ऊंचे पहाड़

इसी के साथ उन लोगों को अलग रखते हुए, यहाँ हिमालय या तिब्बत के ऊपर विमान क्यों नहीं उड़ते हैं इसी के साथ तिब्बती क्षेत्र, विशेष रूप से हिमालय में माउंट सहित 20,000 फीट से अधिक ऊंचे पहाड़ हैं इसी के साथ एवरेस्ट समुद्र तल से 29,035 फीट की ऊंचाई पर स्थित है इसी के साथ अधिकांश वाणिज्यिक हवाई जहाज 30,000 फीट या उससे अधिक दूरी पर उड़ सकते हैं, मगर वे आमतौर पर क्षोभ मंडल में उड़ते हैं।

स्ट्रैटोस्फियर में हवा बेहद पतली होती है

इसी के साथ मान्यता के अनुसार हिमालय के ऊपर एक सुरक्षित दूरी पर उड़ान भरने के लिए, उड़ानों को समताप मंडल के निचले हिस्से में और भी आगे जाना पड़ता है इसी के साथ स्ट्रैटोस्फियर में हवा बेहद पतली होती है।

साथ ही ऑक्सीजन का स्तर भी कम होता है जिस बजह से यहां से उड़ान नहीं हो पाती यदि यहां उड़ान भरी तो इससे यात्रियों को हवा अशांति और बेचैनी होगी इसके अलावा, हवा का बल मजबूत होगा और पहाड़ों की उपस्थिति विमान की पैंतरेबाजी को और भी कठिन बना देती है जिस बजह से प्लेन क्रैश भी हो सकता है।

हिमालयी क्षेत्र में लगभग कोई समतल सतह है ही नहीं आपातकाल में लैंडिंग प्रक्रिया नहीं

इसी लिए समतल भूमि पर आपातकालीन लैंडिंग प्रक्रिया की जाती है, हिमालयी क्षेत्र में लगभग कोई समतल सतह है ही नहीं है, इसलिए आपातकाल की स्थिति में, पायलट के पास विमान को सुरक्षित रूप से उतारने के लिए कोई जगह नहीं बचती हिमालय में इसी लिए ऐसा करना बहुत ही हानिकारक हो सकता है।

भरने के लिए उड़ान को कम से कम 10,000 फीट नीचे उतरना

इसी के साथ इसके शीर्ष पर जोखिम कारक केवल बढ़ता है क्योंकि हर जगह पहाड़ हैं और अधिकांश विमान उच्च ऊंचाई पर उड़ सकते हैं जहां ऑक्सीजन का स्तर काफी कम होता है इसी लिए एयरलाइंस आमतौर पर केवल बीस मिनट ऑक्सीजन के साथ आती हैं।

साथ ही यदि ऐसी स्थिति होती है जिसमें केबिन में ऑक्सीजन की आपूर्ति समाप्त हो जाती है। तो ऑक्सीजन को फिर से भरने के लिए उड़ान को कम से कम 10,000 फीट नीचे उतरना चाहिए। जिसके बाद उसे दुबारा ऑक्सीजन प्राप्त करनी पड़ेगी।

हिमालय में, 10,000 फीट तक उतरना आत्महत्या

इस जहाज का बहाव डाउन प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है। साथ ही हिमालय में, 10,000 फीट तक उतरना आत्महत्या है साथ ही हिमालय और तिब्बती क्षेत्र के बगल में स्थित प्रमुख देश भारत और चीन हैं। दोनों देशों के बीच कई उड़ान सेवाएं नहीं हैं

तो अब हमारे इस आर्टिकल से आप को यह तो पता लग ही गया होगा की क्यों नहीं उड़द सकता हिमालय के ऊपर से जहाज अगर हमारी यह पोस्ट आप को अचे लगे तो ऐसे अपने दोस्तों में अवश्य शेयर करे।