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भारत के महान मुगल शाशक महान अकबर के बारे में जानिए महत्वपूर्ण जानकारी

आज हम आप को भारत के महान मुग़ल शासनकाल में जितने भी राजा महाराजा हुए उनमें से एक ऐसे शासक के बारे में बताने जा रहे हैं ।

आप सभी ने इतिहास के महान शाशक अकबर के बारे में तो सुना होगा। आज हम आप को महान अकबर के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बाते बताने जा रहे हैं ।

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प्रभावशाली और शक्तिशाली राजा

महान अकबर सबसे अलग प्रभावशाली और शक्तिशाली राजा थे। अकबर एक बहुत ही बहादुर और शांतिप्रिय राजा माना जाता था। क्योंकि उसकी सबसे खास बात यह है कि उसने बचपन से राज्य चलाने का काम किया था।

महज 13 साल की छोटी सी उम्र में मुगल राजवंश के सिंहासन पर बैठा

महान अकबर तीसरे मुगल सम्राट थे, जो कि महज 13 साल की छोटी सी उम्र में मुगल राजवंश के सिंहासन पर बैठ गए थे, इसी के साथ उन्होंने अपने मुगल सम्राज्य का न सिर्फ काफी विस्तार किया था। बल्कि हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बल देने के लिए कई नीतियां भी बनाईं थी।

इन्होने अपने शासनकाल में शांतिपूर्ण माहौल स्थापित किया एवं कराधान प्रणाली को फिर से संगठित किया था। उन्हें अकबर-ए-आज़म, शहंशाह अकबर के नाम से भी जाना जाता था यह एक बहुत ही महान शाशक थे।

लगभग सभी विषयों में आसाधरण ज्ञान प्राप्त

भारत के महान मुगल शासक अकबर खुद अनपढ़ थे मगर उन्होंने अपने सम्राज्य में शिक्षा सबसे ज्यादा महत्व देते थे। लेकिन वे एक बुद्धिमान और ज्ञानी शासक थे। जिन्हें लगभग सभी विषयों में आसाधरण ज्ञान प्राप्त था।

इसी के साथ उसके शासन काल में कला, साहित्य, शिल्पकला का काफी विकास हुआ था इसके शाशन काल के दौरान बेहद विकास हुआ है। उसने अपने साम्राज्य में सभी के लिए विशेषरूप से महिलाओं के लिए शिक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया था।

आदर-सम्मान देने वाले महान योद्धा

इसी के साथ उनके द्धारा किए गए नेक कामों की वजह से उन्हें अकबर महान कहकर भी बुलाया जाता था इसी के साथ वे सभी धर्मों को आदर-सम्मान देने वाले महान योद्धा थे, इन्होने सभी धर्मो को एक समान समझा तथा अपनी प्रजा के विकास पर भी ध्यान दिया, कई अलग-अलग धर्मों के तत्वों को इकट्ठा कर अकबर ने नया संप्रदाय दीन-ए-इलाही की स्थापना की थी।

इसी के साथ उनकी पहचान सभी मुगल शासकों में एकदम अलग थी, यह मुगल काल का सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध शाशक हुआ करता था, इन्होने अपने सम्राज्य में विकास के साथ साथ और भी बहुत से कार्य किये।

मुग़ल शासक हुमायु के बेटे

इसी के साथ जलाल उद्दीन अकबर जो साधारणत अकबर और फिर बाद में अकबर एक महान के नाम से जाना जाता था इसी के साथ वह भारत के तीसरे और मुग़ल के पहले सम्राट थे। साथ ही वे 1556 से उनकी मृत्यु तक मुग़ल साम्राज्य के शासक थे साथ ही अकबर मुग़ल शासक हुमायु के बेटे थे।

अकबर अपने काल का एक महान शाशक था। जिन्होंने पहले से ही मुग़ल साम्राज्य का भारत में विस्तार कर रखा था तथा मुगल सम्राज्य का विकास किया।

चौसा और कन्नौज में होने वाले शेर शाह सूरी से युद्ध

इसी के साथ 1539-40 में चौसा और कन्नौज में होने वाले शेर शाह सूरी से युद्ध में पराजित होने के बाद हुमायूँ की शादी हमीदा बानू बेगम के साथ हुई थी। इसी के साथ जलाल उद्दीन मुहम्मद का जन्म 15 अक्टूबर 1542 को सिंध के उमरकोट में हुआ जो अभी पाकिस्तान में स्तिथ है।

चाचा कामरान मिर्ज़ा और अस्करी मिर्ज़ा

इसी के साथ लम्बे समय के बाद अकबर अपने पूरे परिवार के साथ काबुल स्थापित हो गए थे। उनके चाचा कामरान मिर्ज़ा और अस्करी मिर्ज़ा रहते थे। साथ ही उन्होंने अपना बचपन युद्ध कला सिखने में व्यतीत की जिसने उसे एक शक्तिशाली, निडर और बहादुर योद्धा बनाया था यह बेहद शक्तिशाली योद्धा हुए मुगल काल में।

हुमायु ने दिल्ली को 1555 में पुनर्स्थापित किया

इसी के साथ 1551 के नवम्बर में अकबर ने काबुल की रुकैया से शादी कर ली। महारानी रुकैया उनके ही चाचा हिंदल मिर्ज़ा की बेटी थी, इसी के साथ जो उनकी पहली और मुख्य पत्नी थी साथ ही हिंदल मिर्ज़ा की मृत्यु के बाद हुमायूँ ने उनकी जगह ले ली साथ ही हुमायु ने दिल्ली को 1555 में पुनर्स्थापित किया और वहां उन्होंने एक विशाल सेना का निर्माण भी किया इसी के साथ इसके कुछ ही महीनों बाद हुमायूँ की मृत्यु हो गयी तथा यह राजा बन गया।

अकबर ने बैरम खान की मदत से राज्य का शासन चलाया

जब हुमायूँ की मृत्यु हुई उस के बाद अकबर ने बैरम खान की सहायता से राज्य का शासन चलाया क्योंकि उस वक्त अकबर काफी छोटे थे इसी दौरान उन्होंने बैरम खान की सहायता से पुरे भारत में हुकूमत की तथा भारत में अपना शाशन चलाया।

एक बहुत सक्षम और बहादुर बादशाह होने के नाते उन्होंने पूरे भारत में और करीब गोदावरी नदी के उत्तरी दिशा तक कब्ज़ा कर लिया था।

अपनी युद्ध कौशल और अपनी रणनीति से सम्पूर्ण भारत में अधिकार कर लिया

भारत में मुगलों की ताकतवर फ़ौज, राजनयिक, सांस्कृतिक आर्थिक वर्चस्व के कारण ही अकबर ने पुरे देश में कब्ज़ा कर लिया था महान अकबर अपनी युद्ध कौशल और अपनी रणनीति से सम्पूर्ण भारत में अधिकार कर लिया था।

अपने मुग़ल साम्राज्य को एक रूप बनाने के लिए अकबर ने जो भी प्रान्त जीते थे उनके साथ में एक तो संधि की या फिर शादी करके उनसे रिश्तेदारी की ताकि उस का शाशन बना रहे तथा अन्य राज्यों से उस के संबध अच्छे रहे।

विभिन्न धर्म और संस्कृति के लोग रहते थे

इसी के साथ अकबर के राज्य में विभिन्न धर्म और संस्कृति के लोग रहते थे और वो अपने प्रान्त में शांति बनाये रखने के लिए कुछ ऐसी योजना अपनाते थे, जिस से लोगों को भी खुश रखा जा सके तथा उस का विद्रोह जनता ना करे। जिसके कारण उसके राज्य के सभी लोग काफी खुश रहते थे जिस बजह से अकबर लम्बे समय तक भारत पर राज कर पाया।

24,000 से भी अधिक संस्कृत, उर्दू, पर्शियन, ग्रीक, लैटिन, अरबी और कश्मीरी भाषा की क़िताबे

इसी के साथ ही अकबर को साहित्य काफी पसंद था और उसने एक पुस्तकालय की भी स्थापना की थी, जिसमें बहुत सी पुस्तकें ही जब भी उसे समय लगता वो उन्हें पढ़ा करते थे,इन पुस्कतों में करीब 24,000 से भी अधिक संस्कृत, उर्दू, पर्शियन, ग्रीक, लैटिन, अरबी और कश्मीरी भाषा की पुस्तकें थी।

साथ ही कई सारे विद्वान्, अनुवादक, कलाकार, सुलेखक, लेखक, जिल्दसाज और वाचक भी अकबर के दरबार में रहते थे। जिनकी वजह से उस के दराबर में बेहद शांति का माहौल रहता था।

ने हिन्दू, मुस्लीम के लिए कई स्कूल भी खोले

इसी के साथ खुद अकबर ने फतेहपुर सिकरी में महिलाओं के लिए एक पुस्तकालय की भी स्थापना की थी, ताकि महिलाएं भी शिक्षा ग्रहण कर सके, तथा उसने हिन्दू, मुस्लिम के लिए कई स्कूल भी खोले थे।

पूरी दुनिया के सभी कवि, वास्तुकार और शिल्पकार अकबर के दरबार में इकट्टा होते थे विभिन्न विषय पर चर्चा करते थे तथा पुस्तके लिखते थे।

दिल्ली आगरा और फतेहपुर सिकरी के दरबार कला के साथ साहित्य और शिक्षा के मुख्य केंद्र

इसी के साथ अकबर के दिल्ली, आगरा और फतेहपुर सिकरी के दरबार कला के साथ साहित्य और शिक्षा के मुख्य केंद्र बन चुके थे। साथ ही वक्त के साथ पर्शियन इस्लामिक संस्कृति भारत के संस्कृति के साथ घुल मिल गयी और उसमे एक नयी इंडो पर्शियन संस्कृति ने जन्म लिया साथ ही इसका दर्शन मुग़लकाल में बनाये गए पेंटिंग और वास्तुकला में देखने को मिलता है। आज भी यहां अकबर द्वारा बनाये गए लेख तथा वास्तुकला देखने को मिलती है।

पारसी और ख्रिचन धर्म का भी कुछ हिस्सा शामिल

महान अकबर ने अपने राज्य में एक धार्मिक एकता बनाये रखने के लिए इस्लाम और हिन्दू धर्मं को मिलाकर एक नया धर्मं ‘दिन ए इलाही’ को बनाया, यह अपने आप में उस समय बहुत बड़ी बात हुई करती थी उसने दो धर्मो के लोगो को आपस में मिला दिया था। जिसमे पारसी और क्रिश्चिन धर्म का भी कुछ हिस्सा शामिल किया गया था।

साथ ही अकबर ने जिस धर्म की स्थापना की थी वो बहुत सरल, सहनशील धर्म था और उसमे केवल एक ही भगवान की पूजा की जाती थी। साथ ही किसी जानवर को मारने पर रोक लगाई गयी थी, अकबर ने अपने राज में जानवरो को भी सरक्षण प्रदान किया।

धर्म का अधिक विरोध भी नहीं

इस धर्म में शांति पर ज्यादा महत्व दिया जाता था ताकि जनता में शांति बनी रहे। इस धर्म में ना कोई रस्म रिवाज थी, ना कोइ ग्रंथ और नाही कोई मंदिर या पुजारी था, जिस वजह से इस धर्म का अधिक विरोध भी नहीं हुआ।

इसके साथ ही अकबर के दरबार में बहुत सारे लोग भी इस धर्मं का पालन करते थे साथ ही वो अकबर को पैगम्बर भी मानते थे तथा उनकी बहुत ही इज्जत भी किया करते थे। साथ ही बीरबल भी इस धर्मं का पालन करता था जो अकबर के दराबर में एक कुशल व्यक्ति था।

भारत के इतिहास में अकबर के शासनकाल को काफी महत्व दिया गया

साथ ही भारत के इतिहास में अकबर के शासनकाल को काफी महत्व दिया गया है जिस का असर भी भारत के विभिन्न क्षेत्रों में पड़ा था।

साथ ही अकबर शासनकाल के दौरान मुग़ल साम्राज्य तीन गुना बढ़ चूका था साथ ही

उतना ही शक्तिशाली भी बन चूका था। साथ ही उसने बहुत ही प्रभावी सेना का निर्माण किया था और कई सारी राजनयिक और सामाजिक सुधारना भी लायी थी जिस बजह से प्रजा भी पूरी तरह से सुरक्षित रहा करती थी।

हिन्दू मुस्लीम एकता के महत्त्व को समझकर एक अखण्ड भारत निर्माण किया

महान अकबर भारत के उदार शासकों में गिना जाता है। इसे संपूर्ण मध्यकालीन इतिहास में वो एक मात्र ऐसे मुस्लीम शासक हुए हैं, जिन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता के महत्त्व को समझकर एक अखण्ड भारत निर्माण करने का प्रयास तथा बहुत से अन्य कार्य भी किये हैं।