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जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर के बारे में कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्य

आज हम आप को अपनी इस पोस्ट के द्वारा 15 अक्टूबर 1542 ई. में अमरकोट में जन्में जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर के बारे में कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण बातों की जानकारी देंगे। इसी के साथ महज 9 साल की उम्र में गजनी का सूबेदार नियुक्त किया गया था अकबर 13 साल की उम्र में मुगल सिंहासन पर बैठ गए थे ,साथ ही में 1555 ईसवी में हुंमायू ने अकबर को अपना युवराज घोषित किया था।

1556 ईसवी में अकबर के संरक्षक बैरम खां ने उनका राज्याभिषेक करवाया

जिसके बाद 1556 ईसवी में अकबर के संरक्षक बैरम खां ने उनका राज्याभिषेक करवाया था तथा अकबर ने बेरम खान की मदद से सम्पूर्ण भारत पर राज किया था। इसी के साथ मुगल सम्राट अकबर ने 1556 में अपनी जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ी।उन्होंने यह लड़ाई हेमू के खिलाफ लड़ी थी, और हेमू और सुर सेना का बहादुरी से मुकाबला कर उन्हें परास्त किया था।

अकबर महान, अकबर-ऐ-आजम, मशहाबली शहंशाह के नाम से भी जाना जाता

अकबर ने फतेहपुर सीकरी के साथ बुलंद दरवाजा का भी निर्माण करवाया था जो आज भी अपने आप में बहुत ही अद्भुत कलाकृति का नमूना माना जाता है। इसी के साथ सबसे अलग मुगल सम्राट के रुप में अपनी पहचान विकसित करने वाले अकबर को अकबर महान, अकबर-ऐ-आजम, मशहाबली शहंशाह के नाम से भी जाना जाता है। इसी के साथ महान अकबर ने 1582 ईसवी में दीन-ए-इलाही नामक धर्म की स्थापना की थी।

अबुल फजल ने अकबरनामा (Akbarnama) ग्रंथ की रचना की

सन 1576 ईसवी में महाराणा प्रताप और जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर के बीच हल्दीघाटी का घमासान युद्ध हुआ, इस युद्द में अकबर ने विजय प्राप्त की तथा अपने बल और शक्ति का प्रदर्शन दिया,अकबर के शासनकाल को हिन्दी साहित्य का स्वर्णकाल माना जाता है साथ ही अबुल फजल ने अकबरनामा (Akbarnama) ग्रंथ की रचना की थी जो बहुत ही प्रलचित मानी जाती है।

अकबर के दरबार में 09 रत्न थे

अकबर के दरबार में 09 रत्न थे, जिसमें तानसेन, टोडरमल, बीरबल, मुल्ला दो प्याजा, रहीम खानखाना, अ्बुल फजल, हकीम हुकाम, मानसिह शामिल थे, यह सभी अपने अपने कार्य में माहिर थे। इसी के साथ अकबर अशिक्षित था, लेकिन उसे लगभग हर विषय में असाधारण ज्ञान प्राप्त था, साथ ही वह अपना स्मरण शक्ति के लिए जाना जाता था। वो एक बार जो सुन लेता था, वो उस के दिमाग में छप जाता था।

1556 से 1605 तक मुगल सिंहासन पर राज करने वाले अकबर की मृत्यु अतिसार रोग के कारण हो गई

इसी के साथ मुस्लिम शासक होते हुए भी मुगल शासक अकबर ने हिन्दुओं के हित में कई काम किए, हिन्दु तीर्थयात्रियों द्धारा दिए जाने वाले जजीया कर और यात्री कर को माफ किया ताकि हिन्दू आसानी से धार्मिक यात्राएं कर सके, 1556 से 1605 तक मुगल सिंहासन पर राज करने वाले अकबर की मृत्यु अतिसार रोग के कारण हो गई थी।

अकबर को एक बहादुर, बुद्धिमान और शक्तिशाली शहंशाह माना जाता

इसी के साथ जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर अपनी प्रजा के लिए किसी भगवान् से कम नहीं था, इतिहास कहता है कि उनकी प्रजा उनसे बहुत प्यार करती थी साथ ही में वे भी सदैव अपनी प्रजा में हो रहे तकलीफों से वाकिफ होकर उन्हें जल्द से जल्द दूर करने का प्रयास करते इसी के साथ इतिहास में शहंशाह जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर को एक बहादुर, बुद्धिमान और शक्तिशाली  शहंशाह माना जाता है। इन्होने जनता के लिए बहुत से कार्य किये हैं।

अकबर का अपने सम्राज्य में बहुत मान सम्मान था

महान अकबर के दरबार की सबसे विशेष बात थी, उसके दरबार में एक से बढ़कर एक कलाकार, विद्वान्, साहित्यिक रहा करते थे जिन से वो ज्ञान भी प्राप्त करता रहता था।

वो सभी अपने अपने काम में निपुण थे। अकबर के दरबार कुछ ऐसे ही 9 लोग थे जिन्हें “अकबर के नवरत्न” कहा जाता था इसमें बीरबल, अबुल फ़ज़ल, टोडरमल, तानसेन, मानसिंह, अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना, मुल्ला दो प्याज़ा, हक़ीम हुमाम, फ़ैजी इनका समावेश हैं, जो अपने अपने काम में प्रसिद्ध थे। जिस वजह से अकबर की अपने सम्राज्य में बहुत मान और शान थी।

अकबर ने अपने अनुभवी और निपुण 09 व्यक्तियों को नवरत्न नाम दिया

यह सभी जब एक साथ दरबार में जमा होते थे तो वो नजारा काफी देखने जैसा बन जाता था सभी अनुभवी और निपुण लोग यहां निवास करते थे। उन सबको अकबर के नवरत्न नाम दिया गया था।

इसीलिए इतिहास में उन्हें अकबर के सबसे अहम नवरत्न माना जाता है।आप ने हमारी इस से पहले वाली पोस्ट नहीं देखी है तो एक बार उस को अवश्य देख लें।