kalka shimla railway

कालका शिमला रेल मार्ग प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर रोमांचित पर्टयक सफर

कालका शिमला रेलवे यात्रा हिमाचल प्रदेश में स्थित एक बहुत ही रोमांचित और प्रसिद्ध पर्टयक स्थान है, जो हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्थित है। हिमाचल अपने बहुत सी विश्व धरोहर और ऐतिहासिक इमारतों के लिए पूरे देश भर में जाना जाता है।

इसी के साथ हिमाचल की राजधानी शिमला में एक ऐसी ही ऐतिहासिक रेलवे है।जो हिमाचल की एक नैरो-गेज रेलवे है।यह प्रसिद्ध रेलवे कालका से शिमला तक जाने के लिए बनाई गई है।

जो खूबूसरत और अद्धभुत दृश्यों की पहाड़ी मार्गो को पार करती हुई कालका से शिमला पहुँचती है।इस रेलवे का सफर पूरे देश भर में अपनी प्रकृति के सौंदर्य के लिए जाना जाता है।

हर साल हजारो की मात्रा में पर्टयक इस सफर का आंनद लेने के लिए आते हैं।यह पहाड़ी सफर बहुत ही रोमांचित और मनमोहित कर देने वाला सफर है।

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रेलवे की स्थापना 1898 और 1903 के बीच हर्बर्ट सेप्टिमस हरिंगटन के निर्देशन में हुई

शिमला में स्थित इस रेलवे की स्थापना 1898 और 1903 के बीच हर्बर्ट सेप्टिमस हरिंगटन के निर्देशन में हुई थी। हिमाचल की यह कालका शिमला रेलवे के शुरुआती इंजनों का निर्माण शार्प, स्टीवर्ट एंड कंपनी द्वारा किया गया था।जिसके दौरान रेल में बड़े इंजनों को पेश किया गया था। जिन को हंस्लेट इंजन कंपनी द्वारा निर्मित किया गया था।

यह डीजल और डीजल-हाइड्रोलिक इंजनों ने क्रमशः 1955 और 1970 में इस रेलवे का परिचालन शुरू कर दिया था।यह इंजन बहुत बड़े होते थे।

भारत के विश्व धरोहर स्थल के पर्वतीय रेलवे में शामिल

इस लोकप्रिय और ऐतिहासिक और अद्धभुत रेलवे को 8 जुलाई 2008 को यूनेस्को ने कालका शिमला रेलवे को भारत के विश्व धरोहर स्थल के पर्वतीय रेलवे में शामिल कर दिया जो हिमाचल प्रदेश के लिए एक बहुत बड़ी बात है।यह एक पर्वतीय रेलवे है।

जिस का निर्माण उस समय किया था जब नई तकनीक और बेहतर औजार भी पर्याप्त मात्रा में नहीं थे।फिर भी इस खूबसूरत रेलवे का निर्माण किया गया था।

यह रेलवे अपने 115 वर्ष के सफर में अपना इतिहास को संजोए हुए हैं ।इस रेलवे की लम्बाई लगभग 96 किमी है।

इस खूबसूरत पहाड़ी रेलमार्ग में 18 स्टेशन हैं। इसमें रोमांचित कालका-शिमला रेल को केएसआर के नाम से भी जाना जाता है।

ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार 1921 में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस मार्ग से यात्रा की थी।

रेलवे को गिनीज बुक ऑफ रेल फैक्ट्स एंड वीट ने भारत की सबसे बड़ी नैरो गेज इंजीनियरिंग का दर्जा

हिमाचल प्रदेश में स्थित कालका- शिमला रेलवे को भारतीय रेल प्रणाली के साथ ब्रिटिश राज के दौरान भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला को जोड़ने के लिए बनाया गया था।

शिमला में स्थित इस रेलवे को गिनीज बुक ऑफ रेल फैक्ट्स एंड वीट ने भारत की सबसे बड़ी नैरो गेज इंजीनियरिंग का दर्जा दिया है।

जो एक बहुत बड़ी बात है।1896 में इस रेलमार्ग को बनाने का कार्य दिल्ली-अंबाला कंपनी को सौंपा गया था। जिसके दौरान अंबाला डिवीजन वर्ल्ड हेरिटेज साइट कालका शिमला रेलवे का गौरवशाली संरक्षक है।

शिमला रेलमार्ग में 103 सुरंगें पर्टयकों को करती हैं बेहद रोमांचित

इस खूबसूरत और प्रसिद्ध कालका शिमला रेलमार्ग में 103 सुरंगें हैं। जो पर्टयकों को बेहद रोमांचित करती है। इन सुरंगो का दृश्य बहुत ही खूबसूरत है। जो प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है।

इसलिए हर साल बहुत से पर्टयक इस रेल की यात्रा करने के लिए आते हैं। कालका शिमला रेलवे हिमाचल में स्तिथ सैलानियों के लिए आकर्षण का एक मुख्य केंद्र है।

ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार पहले आंग्ल-गोरखा युद्ध के तुरंत बाद शिमला अंग्रेजों द्वारा बसाया गया था और यह हिमालय की तलहटी में 7,116 फीट (2,169 मी) पर स्थित है।

कालका-शिमला रेलवे का निर्माण ब्रिटिश राज के दौरान हुआ

बताया जाता है कि शिमला 1864 में ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी बन गया था। इसी के साथ भारत में ब्रिटिश सेना का मुख्यालय स्थापित हो गया था।

कालका-शिमला रेलवे का निर्माण ब्रिटिश राज के दौरान भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला को भारतीय रेल प्रणाली से जोड़ने के लिए किया गया था। जिस से ब्रिटिश शासन को बहुत से लाभ मिल पाए।

शिमला रेलमार्ग में तीन वर्षों में 800 से अधिक पुल का निर्माण

हिमाचल प्रदेश में स्थित कालका शिमला रेलमार्ग में तीन वर्षों में 800 से अधिक पुल का निर्माण हुआ था। बताया जाता है कि उस समय किसी न किसी और शत्रुतापूर्ण इलाके में एक आसान काम नहीं था।

बहुत से कारीगरों ने इस रेलमार्ग को बनाने में अपना सहयोग दिया था। पहाड़ को काट कर रास्ता बनाना बहुत ही मुश्किल कार्य था, वो भी उस समय जब उपयुक्त साधन नहीं थे।

इस रेलमार्ग को 9th Nov 1903 पर सार्वजनिक यातायात के लिए खोला गया था। ऐसा माना जाता है कि बाबा भालखू एक स्थानीय संत थे जिनके पास कुछ अलौकिक इंजीनियरिंग कौशल थे।

बाबा भलखू का रेलवे निर्माण में अहम योगदान

इन्होने इस निर्माण कार्य में अपना बहुत ही बड़ा योगदान दिया है। कहा जाता है कि भलकू ने इस ट्रैक को बिछाने में ब्रिटिश इंजीनियरों की मदद की। उनकी सेवाओं के प्रति समर्पण में रेलवे ने शिमला में एक संग्रहालय का नाम बाबा भलखू रेल म्यूजियम रखा, जंहा उन से संबधित बहुत सी ऐतिहासिक वस्तुओं को रखा गया।

खूबूसरत पहाड़ी यात्रा

कालका शिमला रेलमार्ग में स्थित बड़ोग सुरंग (संख्या 33) 3752 फीट यह सुरगं कालका शिमला रेलवे लाइन की सबसे लंबी सुरंग है। जिसकी लम्बाई 1 कि,मी की है। इस रेलमार्ग में कुछ पुल अद्वितीय हैं।

विशेष रूप से ब्रिज नंबर 226 और 541 इस अवधि के दौरान इस खंड के सबसे शानदार पुल माने जाते हैं।

इस लोकप्रिय पर्टयक स्थान में सर्दियों के मौसम में जनवरी में मध्यम तीव्रता का हिमपात होता है। सर्दियों में बर्फ को साफ करने के लिए इंजन पर स्नो कटर लगे होते हैं जो बर्फ को रेल पटरियों से साफ करते हैं।

बर्फ प्रेमियों के लिए एक रोमांचित पहाड़ो की खूबसूरत यात्रा

हिमाचल प्रदेश में सर्दियों के मौसम के दौरान यह रेलमार्ग बहुत ही खूबसूरत होता है। बर्फ की चादर इसे अपने ऊपर लिए चलती है। जिसका दृश्य बहुत ही आकर्षित होता है।

हर साल बहुत से पर्टयक सर्दियों के समय में इस हिल स्टेशन में यात्रा के लिए आते हैं। जो पर्टयकों को बेहद शांति और सकून प्रदान करते हैं।

मगर कई बार भारी बर्फ़बारी के दौरान इसे रोकना पड़ता है। क्योंकि यह पहाड़ी राज्य है इस लिए यहां बर्फबारी भारी मात्रा में होती है। इस रेलवे लाइन के अस्तित्व में आने के बाद सबसे भारी हिमपात जनवरी 1945 के पहले ग्यारह दिनों के दौरान हुआ था।

प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर और रोमांचित रेल सफर

जानकारी के अनुसार रेल यातायात 14 जनवरी, 1945 तक बाधित रहा। इस रेलमार्ग में भूस्खलन भी काफी मात्रा में होते हैं। जिसमे सबसे गंभीर समझौता 1978 और 2007 में हुआ था।

अगस्त, 2007 में कोटि स्टेशन की इमारत का भारी हिस्सा बह गया। इस रेलमार्ग के ट्रैक को कई दिनों के बाद सेवा में लाया गया। यदि आप को कभी समय मिले तो इस स्थान में जाना ना भूले तथा शिमला में स्थित इस कालका शिमला रेलवे का आनंद ले।

यह रेलमार्ग आप को प्रकृति के बहुत से अनोखे दृश्य प्रदान करेगा। यह रेलमार्ग हरे भरे जंगल और प्राकृतिक सौंदर्य आप के दिलो-दिमाग को बहुत ही शांति और बेहतर अच्छा महसूस करवाएगा।

हिमाचल प्रदेश में स्तिथ शिमला का यह रेलमार्ग बहुत ही रोमांचित और आकर्षित रेलमार्ग है।