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Ki math लाहौल स्पीति में स्तिथ एक लोकप्रिय और प्रसिद्ध पर्टयक स्थान

की गोम्पा हिमाचल प्रदेश के जिला लाहौल स्पीति में स्तिथ एक बहुत ही लोकप्रिय और प्रसिद्ध पर्टयक स्थान है। जो देश विदेश में अपनी लोकप्रियता के लिए जाना जाता है।

यह एक बहुत ही ऐतिहासिक बौद्ध मठ है। हिमाचल प्रदेश में बहुत से ऐसे स्थान है जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिकता,खूबसूरती और शांत वातावरण के लिए विश्व भर में लोकप्रिय और प्रसिद्ध है।

लाहौल स्पीति के मुख्यालय काजा से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ

जिन में से एक है हिमाचल प्रदेश में स्थित यह “की गोम्पा” यह भारत के सबसे प्राचीन क्षेत्रो में से एक माना जाता है। जोकि बौद्ध धर्म के अनुययियो के लिए एक प्रसिद्ध स्थान माना जाता है।

यह धार्मिक स्थान हिमाचल प्रदेश की लाहौल स्पीति के मुख्यालय काजा से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ एक प्रसिद्ध पर्टयक स्थान है। यह लोकप्रिय मठ स्पीति वैली का सबसे प्राचीन मठ माना जाता है।

प्रसिद्ध बौद्ध मठ की ऊंचाई समुद्रतल से लगभग 13,504 फीट है

हिमाचल प्रदेश के स्पीति घाटी में यह एक प्रसिद्ध तिब्बती बौद्ध मठ है। यह बौद्ध मठ हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में स्पीति नदी के किनारे स्तिथ एक बहुत ही रोमांचित और लोकप्रिय पर्टयन स्थान है।

इस प्रसिद्ध बौद्ध मठ की ऊंचाई समुद्रतल से लगभग 13,504 फीट है। यह मठ एक शंक्‍वाकार चट्टान पर निर्मित है। ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओ के अनुसार इस लोकप्रिय और प्रसिद्ध मठ का निर्माण “रिंगछेन संगपो” ने करवाया था।

यह मठ महायान बौद्ध के जेलूपा संप्रदाय से संबंधित एक धार्मिक बौद्ध मठ है।

यह मठ लगभग एक हज़ार साल से भी पुराना

“की गोम्पा” हिमाचल प्रदेश में स्तिथ बहुत ही ऐतिहासिक धार्मिक स्थानों में से एक माना जाता है। इस मठ का निर्माण 11 वीं शताब्दी का माना गया है।

यह मठ लगभग एक हज़ार साल से भी पुराना माना जाता है और अभी भी इसकी खूबसूरती यहां आए सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

इसमें अभी भी प्राचीन बौद्ध स्क्रॉल और पेंटिंग स्तिथ हैं। इस मठ में कुछ प्राचीन हस्‍तलिपियों तथा थंगकस का संग्रह कर के रखा गया है।

बौद्ध धर्म की धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए लोकप्रिय स्थान

इस धार्मिक मठ में बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु, नन और लामा यहां अपनी धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए इस मठ में आते रहते है साथ ही यह स्थान ध्यान लगाने के लिए भी एक उचित धार्मिक स्थान माना जाता है।

अपनी हिमाचल प्रदेश की यात्रा में इस स्थान को अवश्य शामिल करे।

14वीं सदी की मठवासी वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण

यह स्पीति घाटी का सबसे बड़ा बौद्ध मठ और लामास के लिए सबसे बड़ा एक धार्मिक प्रशिक्षण केंद्र माना जाता है। इसकी प्राकृतिक सुन्दरता इस मठ को ओर भी ज्यादा बढ़ा देती है।

इस धार्मिक मठ की दीवारो में कई तरह के चित्रों और मूर्तियों को चित्रित किया गया है। भारतीय पुरातत्व अध्यन से यह ज्ञात होता ही की यह चित्रों और

मूर्तियों 14वीं सदी की मठवासी वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है। जो उस समय बेहद प्रचलित थी। यह वास्तुकला चीनी वास्तुकला से प्रभावित होकर विकसित की गई थी इस वास्तुकला से यह मठ और भी ज्यादा आकर्षित हो जाता है।

1841 के आस-पास गुलाम खान और रहीम खान की सत्ता में उनकी सेना ने इस मठ को क्षतिग्रस्त कर दिया था

वर्ष 1855 में आई एक रिपोर्ट की जानकारी के अनुसार इस मठ में लगभग 100 भिक्षुओं को बौद्ध धर्म की शिक्षा दी गयी थी। हर साल बहुत से भिक्षुओ को यहां शिक्षा दी जाती है।

वर्ष 1830 में लद्दाख और कुल्लू के बीच हुए युद्ध के कारण इस मठ और यहां के आस-पास के क्षेत्रो को काफी क्षति पंहुची थी।

लगभग 1841 के आस-पास गुलाम खान और रहीम खान की सत्ता में उनकी सेना डोगरा ने इस क्षेत्र को काफी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया था। वर्ष 1975 ई में यहाँ एक हिंसक भूकंप आया था।

1840 के दशक में यहाँ पर आग लग गई जिसके कारण की मठ जलकर राख हो गया था

जिसने इस क्षेत्र को काफी अधिक नुकसान पहुंचाया था। परंतु भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राज्य लोक निर्माण विभाग की सहयता के कारण इस क्षेत्र को फिर से ठीक कर लिया गया था।

आज भी यह स्थान अपनी ऐतिहासिकता के लिए देश विदेश में जाना जाता है।

जिसके कुछ समय बाद यहाँ पर सिखों ने भी हमला कर दिया था। इतना कुछ होने की वजह से भी यह धर्मिक स्थान सुरक्षित रहा यह क्षेत्र काफी सारे युद्धों के झेलने के बाद पुन: खड़ा ही रहा था।

कहा जाता है की इस स्थान में 1840 के दशक में यहाँ पर आग लग गई जिसके कारण की मठ जलकर राख हो गया था। बाद में इस मठ को पुन:निर्मित किया गया था। जिस के बाद यह स्थान फिर से खड़ा कर दिया गया।

यहां की यात्रा करने का सही समय

यदि आप हिमाचल प्रदेश घूमने का प्लान बना रहे और यदि आप भी बौद्ध धर्म में रूचि रखते हो और आप को इस स्थान में एक बार यात्रा अवश्य करनी चाहिए। यह स्थान आप को भुतही रोमांचित करेगा।

आप के लिए यहां आने का सही समय गर्मियों के मौसम के दौरान का होता है।

यदि आप अपनी हिमाचल यात्रा को यादगार बनाना चाहते है तो इस स्थान की यात्रा अवश्य करे जून और अक्टूबर के बीच की मठ की यात्रा करना चाहिए इस दौरान

सर्दियों के दौरान यहां का नजारा

यहां आने के सभी रास्ते साफ़ होते है। तथा आप की यहां की यात्रा बेहद सुखदायक हो जाती है। सर्दियों में यहां आना मुस्किलो भरा हो जाता है। भारी बर्फबारी की बजह से यहां आने के सभी रस्ते बंद हो जाते है।

यदि आप लाहौल स्पीति आने का प्लान बना रहे है तो इस स्थान की एक बार यात्रा अवश्य करे।